सावन मास के मंगलवार को मंगला गौरी व्रत का विधान है। यह व्रत माता पार्वती को समर्पित माना गया है। ऐसे में नाग पंचमी के दिन भगवान शंकर के साथ माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त करने का संयोग बन रहा है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार, अग्नि पुराण में लगभग 80 प्रकार के नागों का वर्णन मिलता है। इसमें अनंत, वासुकि, पदम, महापध, तक्षक, कुलिक और शंखपाल प्रमुख माने गए हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार राहु के जन्म नक्षत्र भरणी के देवता काल हैं और केतु के जन्म नक्षत्र के के देवता सर्प हैं। अत: राहु-केतु के जन्म नक्षत्र देवताओं के नामों को जोड़कर कालसर्प योग कहा जाता है। राशि चक्त्र में 12 राशियां हैं, जन्म पत्रिका में 12 भाव हैं एवं 12 लग्न हैं। इस तरह कुल 288 काल सर्प योग घटित होते हैं।